अब भारत को अगला कदम यह सोचने की ज़रूरत है कि वह अपनी सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बीजिंग के साथ संवाद की शुरुआत करे। वर्षों की शत्रुता और चीन के भारत-विरोधी रुख, साथ ही उसकी वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षाओं ने स्वाभाविक रूप से गहरे अविश्वास का माहौल बना दिया है। हालांकि, अब परिस्थितियाँ इस बात पर पुनर्विचार के लिए अनुकूल हैं कि क्या मौजूदा…
